सामने की हवेली से आती पकवानों की खुश्बू ने
मुझे और भी बैचेन कर दिया
शायद मेरे झुग्गी के सामने इम्पाला वाला
वह घर लक्ष्मी का इंतजार कर रहा था
उसके मालिक ने मेरी पुताई के पैसे
अगले दिन देने के लिए कहा था
अहसान जताते हुए गंधाती हुई मिठाई के
दो टुकड़े और चार बासी पूरिया
मेमसाब ने दी थी
खुश्बू ने मेरी आग को और भी भड़का दिया था
मैंने बासी पुरियों के टुकड़े अपने मुह में दबा लिए
पुष्टे जैसे ये टुकड़े गलने का नाम ही नहीं ले रहे थे
इतने में मेरा पप्पू दौड़ता हुआ अन्दर घुसा
हाथ में उसके कागज का एक पुडा था
बोला बापू में फुलझड़ी लाया हूँ
मैंने अपनी आंखे फैला कर देखा
बमों में मसलों को मेरा वो नन्हा दिया सलाई से
आग लगाने की कोशिश कर रहा था
जैसे ही बारूद जला वह ख़ुशी से नाचने लगा
मैंने बासी मिठाई का टुकड़ा उसके मुह में डाल दिया
उसने एक उवाकई सी ली और बोला
बापू क्या इस साल हमें जलेबी खाने नहीं मिलेगी
दूर कही से किसी के हज़ार पटाखे वाली लड़
चलाने की आवाज़ आ रही थी मनो कोई
हमारी गरीबी का मजाक उड़ा रहा हो
मनीष शर्मा
तहसीलदार बसोदा




